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की हर देवियाँ है मुझमें कवि है किसलिए है क्यू है दिखती कौन है औरत में रहा है बुढापा सदैव हमें तू दिखती कविता है कोकिला लता दीदी किसी कोण किसी दिशा से देखो पूरी दिखती है नदी। (इसी कविता से) संसार

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